Saturday, November 18, 2006

ए मेरे यार...

राज़ की है बात ये तुम ना किसी को बताना
लोग पागल समझेंगे ना किसी को सुनाना

होगा यूँ घर मे अक्सर गैरों का आना जाना
मेरी तस्वीर तुम दीवार पर ना लगाना

बैठेंगे यार जब भी तो उठेगा वही अफ़साना
गुज़रेगी रात बातों मे बातों को भूल जाना

कोई पूछे कभी तुझसे कौन है तेरा दीवाना
खुल के लेना मेरा नाम यार तू ना शरमाना

ज़माने का क्या है चाहे वो सबको आज़माना
गर पूछे कभी तो ख़ासियत मेरी ना बताना

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