Thursday, November 23, 2006

निंदिया री...

निंदिया री तू काहे ना आए
ये नैना मेरे बुलाएँ तुझे
बावारी रैना भी है ढूँढे तुझे
निंदिया री तू काहे ना आए

मुलाक़ात है आज ख्वाब मे
सोया है वहाँ कोई बैठे बैठे
इंतज़ार उसका काहे तू बढ़ाए
निंदिया री काहे ना तू आए

यार मेरा मुझसे नाराज़ होगा
ज़रा देख होने वाली है सहर
आ भी जा तू काहे यूँ सताए
निंदिया री तू काहे ना आए

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