वो है कहाँ?
हैं चेहरे ख़ूबसूरत बहुत से यहाँ
वो चेहरा लेकिन छुपा है कहाँ
जिसकी रातों मे ख्वाब मेरा है
जिसके होंठों पे नाम मेरा है
वो है कहाँ?
आँखें चमकती हुईं ज़ुल्फ़ बिखरी हुई
होगी यहीं कहीं खोई खोई हुई
जिसकी आँखों मे इंतज़ार मेरा है
जिसके चेहरे पे ऐतबार मेरा है
वो है कहाँ?
मेरी चाहत मे ख़ुद से अनजान है
ढूँढती है मुझको आईने मे कहीं
जिसकी साँसों मे धड़कन मेरी है
जिसके कंगन मे छन छन मेरी है
वो है कहाँ?
आवाज़ मेरी है सरगम है उसकी
दिल है मेरा धड़कन है उसकी
बेचैन मैं हूँ होगी बेक़रार वो भी
ज़िंदगी तू ना सता अब बता दे मुझे
वो है कहाँ?
[अरविंद]

1 Comments:
yup!! u shud ;)
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